Strawberry in Hindi- Strawberry Farming Business Plan

Strawberry in Hindi: स्ट्रॉबेरी एक ऐसा फल है जो ना केवल खाने में स्वादिष्ट और नरम होता है बल्कि यह कई तरह के विटामिन और पोषक तत्व से भरपूर होता है। इसी कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग में लगातार वृद्धि होती जा रही है परंतु इसकी पूर्ति उतनी अधिक नहीं है।

इस कारण यदि आप Strawberry cultivation यानी की स्ट्रौबरी की खेती करते हैं और उसका व्यापार (Strawberry farming business) करते हैं तो निश्चित रूप से आपको लाभ प्राप्त होता है। यदि आप 1 एकड़ मैं स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं तो वह आपको 10 से 12लाख रुपए तक की आमदनी दे देती है।

आज के समय में कई युवा जिन्होंने इंजीनियरिंग और एमबीए जैसी पढ़ाई की होती है वह भी अपनी नौकरी छोड़ कर Farming Business की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसका कारण केवल यही है कि यह एक ऐसा व्यापार है जिसके जरिए आप प्रत्येक महीने एक से ₹2 लाख तक की आमदनी निश्चित ही प्राप्त कर सकते हैं। बस जरूरत है उचित आमदनी वाली फसलों का चुनाव करने और आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने की। आज के हमारे इस लेख में हम आपको strawberry farming business plan के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

strawberry-in-hindi-strawberry-farming-business-plan-in-hindi
Image Created at Canva

Strawberry farming business plan क्या है?

Strawberry ki Kheti करके आप लाखों की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। यह एक ऐसा Business है जिसमें आपको बहुत कम खर्चे पर 3 गुना अधिक मुनाफा देखने को मिलता है। परंतु इसके लिए आपको कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं।

स्ट्रॉबेरी की खेती करने के लिए आपको आधुनिक पद्धति का इस्तेमाल करना पड़ता है। भारत में आज लाखों लोग पारंपरिक कृषि पद्धति को छोड़ आधुनिक कृषि पद्धति को अपना रहे हैं और लाभ कमा रहे हैं। इसी प्रकार यदि आप चाहें तो आप भी Strawberry Farming Business कर सकते हैं।

Strawberry in Hindi: स्ट्रॉबेरी ठंडे और पहाड़ी इलाकों में पैदा किए जाने वाला एक फल है जो आज के समय में काफी ज्यादा मांग रखता है। भारत में यह पहाड़ी इलाकों जैसे नैनीताल, दार्जिलिंग, देहरादून, हिमाचल प्रदेश, नीलगिरी, महाबलेश्वर इत्यादि जगहों पर व्यवसायिक रूप से उगाया जाता है। परंतु ऐसा नहीं है कि आप इसे कहीं और नहीं उगा सकते।

अब तो इसे कहीं भी उगाया जा सकता है। परंतु उसके लिए आपको पॉलीटनल विधि जैसी आधुनिक विधियों का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा यदि आप इस फसल को बलुआही मिट्टी में उगाते हैं तो यह काफी लाभदायक साबित होगा क्योंकि बलुई मिट्टी इस फसल के लिए काफी अच्छी मानी जाती है।

हम आपको बता दें कि Strawberry की बेल काफी लंबी होती है। इस कारण इसकी खेती करने के लिए बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती है। लंबी होने पर इसे लकड़ी के सहारे लटका दिया जाता है परंतु यदि आप स्ट्रॉबेरी की खेती करना चाहते हैं तो आपके पास 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। परंतु यदि आपके पास इतनी जमीन नहीं है तो आप छोटे स्तर पर भी इसका उत्पादन कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें:

आखिर स्ट्रॉबेरी की इतनी मांग क्यों है- High demand of Strawberry in Hindi

  • हम आपको बताना चाहते हैं कि स्ट्रौबरी का इस्तेमाल जेली बनाने में किया जाता है।
  • इससे कई प्रकार की आइसक्रीम भी बनाई जाती है और कई प्रकार की मिठाइयों को बनाने में भी स्ट्रॉबेरी काम आती है।
  • इसके अलावा स्ट्रॉबेरी के अंदर कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं जिन से आंखों की रोशनी मैं वृद्धि होती है।
  • इसके अलावा Strawberry के इस्तेमाल से दांत भी स्वस्थ बने रहते हैं। यही कारण है बाजार में स्ट्रॉबेरी एक ऐसा फल है जो ₹300 से ₹400 प्रति किलो के भाव में बेचा जा रहा है।

Strawberry Farming Profit in India

Farming Investment in Strawberry in Hindi

यदि स्ट्रॉबेरी उत्पादन द्वारा होने वाले लाभ और निवेश की बात करें तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है की स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करने के लिए आपको कितने निवेश की आवश्यकता है और उसका कितना फायदा आपको मिल सकता है?

यदि आप स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करीब 1 एकड़ में कर रहे हैं तो आपको इसके उत्पादन में करीब एक लाख से ₹2 लाख तक खर्च करने पड़ सकते हैं। परंतु इसके पश्चात आपको करीब 15 लाख रुपए तक का लाभ भी प्राप्त हो सकता है। ऐसा इसलिए है कि इसका बाजार मूल्य आम फसलों के मुकाबले अधिक है।

बाजार में 1 किलो स्ट्रॉबेरी का दाम करीब ₹300 से ₹400 प्रति किलो है। पहले यह ₹200 किलो मिला करती थी परंतु बढ़ते समय के साथ इसकी कीमत भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि स्ट्रॉबेरी के पौधे के मूल्य की बात करें तो आपको स्ट्रॉबेरी का एक पौधा खरीदने के लिए ₹3 से ₹4 तक खर्च करने पड़ते हैं। परंतु स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करने के लिए आपको कई अन्य खर्चे भी करने पड़ते हैं जैसे खाद और कीटनाशक तथा आधुनिक तकनीक पर होने वाला खर्च।

ये भी पढ़ें:

Strawberry की खेती के लिए कहां से करें खरीद और कहां होगी बिक्री?

स्ट्रॉबेरी की खेती करने के लिए आपको इनके पौथों की ज़रुरत पड़ेगी। ये पौधे पहाड़ी इलाकों में आसानी से उपलब्ध हो जायेंगे जैसे आप इसे हिमाचल प्रदेश से भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप के एफ बायोप्लांट प्राइवेट लिमिटेड पुणे से भी इसके पौधों की खरीदारी कर सकते हैं।

यदि बिक्री के विषय में बात करें तो इसके लिए आपको ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है क्योंकि स्ट्रॉबेरी की मांग अधिक होने के कारण इसके खरीदार भी अधिक होते हैं। कई बार फसल लगाने के साथ ही आपको खरीदार भी उपलब्ध हो जाते हैं और वह आपकी फसल का आपको एडवांस में भुगतान कर बुकिंग भी कर देते हैं। इसके अलावा आप नजदीकी बाजार में भी अपनी फसल को बेच सकते हैं और अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

भारत में कहां-कहां होती है स्ट्रॉबेरी की खेती- Strawberry Farming in India

Strawberry in Hindi: कई एग्रीकल्चर के विशेषज्ञों की माने तो स्ट्रॉबेरी एक औषधीय पौधा है। जिसका प्रयोग दवाइयों में भी किया जाता है। इसमें बहुत सारे विटामिन जैसे विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन K आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा इससे कैल्शियम और मैग्नीशियम भी प्राप्त होता है। इस कारण भारत के अलग-अलग जगहों पर इसकी खेती की जाती है।

स्ट्रॉबेरी की खेती ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में की जाती है क्योंकि इस फल के लिए मौसम ठंडा होना आवश्यक है। परंतु आज आधुनिक तकनीक के विकास के दौर में ऐसे इलाके जो गर्म है वह भी इसका उत्पादन कर पा रहे हैं। इस कारण भारत में यह फल मुख्य रूप से उत्तराखंड, कश्मीर, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों में उगाया जा रहा है।

उपरोक्त राज्यों के अलावा अन्य स्थानों पर भी इसकी आंशिक खेती की जाती है जैसे:

Strawberry in Hindi:

  • Strawberry Farming in Karnataka
  • Strawberry Farming in Haryana
  • Strawberry Farming in Rajasthan
  • Strawberry Farming in Punjab
  • Strawberry Farming in Maharashtra
  • Strawberry Farming in Odisha
  • Strawberry Farming in Bihar
  • Strawberry Farming in Assam
  • Strawberry Farming in Uttarakhand
  • Strawberry Farming in Gujarat
  • Strawberry Farming in UP
  • Strawberry Farming in Bangalore
  • Strawberry Farming in Jhansi
  • Strawberry Farming in Chhattisgarh
  • Strawberry Farming in Tamilnadu
  • Strawberry Farming in Varanasi
  • Strawberry Farming in Lucknow
  • Strawberry Farming in Mahabaleshwar
  • Strawberry Farming in Delhi

कैसे करें स्ट्रॉबेरी की खेती- Strawberry Farming Kaise Kare

strawberry-in-hindi-strawberry-farming-business-plan
Image By: Pixabay

यदि आप यह सोच रहे हैं कि Strawberry ki Kheti Kaise kare तो हम आपको बता दें इसकी खेती करना बहुत आसान है। इसके लिए आपको एक उपजाऊ खेत की आवश्यकता है जहां पर आप इसकी खेती कर सकें। इसके लिए सबसे पहले आप अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाएं और यह देखें कि आपका खेत स्ट्रॉबेरी की फसल के लायक है या नहीं।

यदि आपके खेत की मिट्टी का PH 5.0 से 6.5 के बीच है तो आपकी मिट्टी Strawberry के उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाएगी। इसके अलावा यदि आपके खेत में बलुआही दोमट मिट्टी है तो इससे स्ट्रॉबेरी की उपज दुगनी हो सकती है क्योंकि यह स्ट्रॉबेरी के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम किस्म की मिट्टी मानी जाती है।

ये ज़रूर ध्यान रखें कि जो जमीन आपने टमाटर, आलू, काली मिर्च, बैंगन जैसी विलायती फसलों को बोने के लिए तैयार की है उसमें आप कभी भी स्ट्रौबरी की खेती ना करें क्योंकि इससे आप की फसल को नुकसान हो सकता है।

मिट्टी तैयार करने के पश्चात आप अपने खेत में 20 से 30 सेंटीमीटर ऊंचाई पर स्ट्रॉबेरी लगाएं। इसके अलावा आप अपने खेत में करीब 100 से 130 सेंटीमीटर तक की चौड़ाई रखें और प्रत्येक दो पंक्तियों के बीच 40 से 60 सेंटीमीटर तक का गैप बनाकर स्ट्रॉबेरी लगाएं।

ये भी पढ़ें:

Strawberry Farming Time

Strawberry in Hindi: इस फसल की बुवाई के लिए सर्वोत्तम समय 10 सितंबर से लेकर 15 अक्टूबर तक माना जाता है। इस बीच आप इस फसल का उत्पादन कर सकते हैं। यह फसल करीब 7 महीने तक खेत में रहती है और उत्पादन देती है। इस फसल के उत्पादन के समय आपको तापमान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए उपयुक्त तापमान 18 से 30 डिग्री सेल्सियस तक होता है।

फसल बोने के बाद आपको इसकी सिंचाई का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। सबसे पहले आपको पौधे लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करने की आवश्यकता होती है। इसके पश्चात जब एक बार पौधे लग जाएं तो समय-समय पर नमी का ध्यान रखते हुए आप अपनी फसल को पानी दे सकते हैं।

इसके बाद जब फसल पर फल आने लगें तो फव्वारे द्वारा आप अपनी फसल की सिंचाई करें और जब पूरी तरह आपकी फसल पर फल लगने लगें तो उस समय Drip Technique द्वारा सिंचाई करना ज्यादा लाभदायक साबित होता है। सिंचाई के लिए आधुनिक तरीकों का प्रयोग करें।

स्ट्रॉबेरी की कितनी किस्में होती हैं- Types of Strawberry in Hindi

Strawberry in Hindi

वैसे तो स्ट्रॉबेरी की 600 से अधिक प्रजातियां उपलब्ध है जैसे स्वीट चार्ली, ब्लैक मोर, फेयर फॉक्स, एलिसा सिस्कैफ। पर इनके अलावा कैमारोज एक ऐसी किस्म है जो कैलिफोर्निया में तैयार की गई है।इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस पर जल्दी फल आ जाते हैं। यह स्वाद की दृष्टि से बेहद अच्छी और ठोस होती है और इसका जीवन समय भी लंबा माना जाता है।

इसके अलावा एक अन्य किस्म ओफरा है। इसकी विशेषता यह है कि इसके फल अच्छे होते हैं और महक काफी शानदार होती है। इजरायल द्वारा उत्पादित की गई इस किस्म को समय से पहले भी बढ़ाया जा सकता है ।

इसके साथ ही एक अन्य किस्म चैडलर है जिसमें काफी समय तक फसल में फल आते रहते हैं और यह स्वाद में काफी मीठे होते हैं। इन कुछ महत्वपूर्ण किस्मों के अलावा भी 600 से अधिक स्ट्रॉबेरी की किस्म मौजूद है।

स्ट्रॉबेरी की फसल में किस रोग का होता है खतरा?

यदि आप Strawberry farming business plan को सफल बनाना चाहते हैं तो आपको अपनी फसल को कीड़ों से और रोगों से बचा कर रखना होगा। आप की फसल में कुछ रोग जैसे पतिसपाट, खस्ता, फफूंदी पत्ता ब्लाइट एवं सड़न लग सकते हैं। इसलिए रोग लगते ही उसकी सही पहचान करें और किसी कृषि वैज्ञानिक की सलाह लें।

सलाह के पश्चात ही किसी कीटनाशक दवाई का प्रयोग अपनी फसल में करें ताकि आप की फसल रोग मुक्त हो सके और फसल लो कोई नुकसान भी न हो।

ये भी पढ़ें:

स्ट्रॉबेरी के उत्पादन में ध्यान रखने योग्य बातें

यदि आप स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं तो आपको कुछ विशेष सावधानियां रखना आवश्यक है क्योंकि यदि आप इन सावधानियों का ध्यान नहीं रखते तो आप की फसल खराब हो सकती है और आपको नुकसान झेलना पड़ सकता है (Strawberry in Hindi)

  • आपके लिए जरूरी है कि आप अपनी फसल को पाले यानी की तीव्र ठण्डी से बचा कर रखें। पाले से बचाव करने के लिए आप प्लास्टिक लो टनल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें यह प्लास्टिक टनल पारदर्शी होना चाहिए और कम से कम 100 से 200 माइक्रोन वाली होनी चाहिए।
  • इसके अलावा आप फसल उत्पादन के समय तापमान का भी विशेष ध्यान रखें क्योंकि फसल के लिए न तो अत्यधिक गर्मी ही लाभदायक है और ना ही अधिकतर ठंड। दोनों ही स्थिति में फसल का नुकसान हो सकता है इसलिए तापमान का ध्यान रखना आवश्यक है। इसके अलावा बुवाई के समय मिट्टी, सिंचाई इत्यादि का भी उचित ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
  • आप अपनी फसल की तोड़ाई के समय फल को हाथ से ने पकड़े इसके स्थान पर इस की डंडियों को काटें और सारी फसल एक साथ में ना तोड़े बल्कि समय लेकर ही तोड़े। फसल की तोड़ाई से पहले इस बात का ध्यान रखें कि आपके फल लाल हो चुके हों। यदि आपको अपनी फसल की सप्लाई बहुत दूर करनी है तो आप थोड़े कम लाल होने की अवस्था में भी इसे तोड़ सकते हैं।
  • फसल को बाजार में ले जाने के लिए और फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है कि इसे प्लास्टिक की प्लेटों में ही पैक किया जाए। साथ ही प्लेट ऐसी होनी चाहिए जहां हवा जाने के लिए कम से कम एक छेद हो। इसके अलावा यदि आप अपनी फसल को स्टोर करने की सोच रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि इस दौर में 1 दिन तापमान 5 डिग्री सेल्सियस और उसके अगले दिन का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रहे।

भारत सरकार द्वारा मदद प्राप्त करें- Govt Support for Strawberry in Hindi

भारत सरकार स्ट्रौबरी जैसी फसलों के उत्पादन के लिए और आधुनिक पद्धति से फसलों के उत्पादन के लिए प्रत्येक राज्य में किसानों को सहायता उपलब्ध कराती है। आपके लिए भी सरकारी सहायता लेना लाभदायक साबित हो सकता है क्योंकि इससे यदि आप की फसल में कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई सरकार द्वारा की जा सकती है।

आप सरकारी सहायता की मदद से निवेश कर सकते हैं। सरकार आधुनिक कृषि के लिए करीब 40 से 60% तक अनुदान उपलब्ध कराती है। इससे अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपने राज्य के कृषि विभाग से संपर्क करें और इस विषय में पूरी जानकारी प्राप्त कर सरकारी सहायता लें।

निष्कर्ष

दोस्तों, जैसा कि आपने इस लेख में जाना, स्ट्रॉबेरी एक ऐसा फल है जो अपने स्वाद के साथ साथ स्वास्थ्यवर्धक विटामिनों से भरपूर है। इसके खेती अगर सही तरीके से की जाये तो इसमें प्रॉफिट होने की संभावनाएं शत प्रतिशत बढ़ जाती हैं।

हमें उम्मीद है इस लेख के माध्यम से हम आपको Strawberry in Hindi और Strawberry farming business plan in Hindi से संबंधित सभी जानकारियां उपलब्ध करा चुके हैं। इस जानकारी का उपयोग आप अपने व्यवसाय को शुरू करने के लिए कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें:

Sharing Is Caring:

Leave a Comment