फ़िल्म क्रिटिक (Film Critic) कैसे बनें | 7 Best Skills you must have !

Film Critic Kaise Bane: फिल्में देखना किसे पसंद नहीं है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अलग अलग तरह की मूवीज पसंद आती हैं। जब भी सिनेमा हाल मे कोई मूवी रिलीज होती है, उसके पहले शो के बाद से ही दर्शकों की प्रतिक्रियाएं आने लगती हैं। कुछ लोगों को मूवी पसंद आती है और कुछ लोगों को नापसंद। चूंकि सबका taste अलग अलग होता है, इसलिए इन लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर मूवी देखना लाज़मी नहीं है।

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Photo by Rodolfo Clix from Pexels

कभी आपने सोचा है कि आप किसका रिव्यू देख कर मूवी देखने जाते हैं। जी हाँ, आपने बिल्कुल सही बताया, आप Critic’s review देख कर जब मूवी देखते हैं तो आपको मूवी जरूर पसंद आती है। ये रिव्यू देने वाले लोग कोई आम लोग नहीं बल्कि प्रोफेशनल फिल्म क्रिटिक हैं जिनकी प्रतिक्रियाएं या रिव्यू सबसे सही होते हैं। आज के इस पोस्ट में मैं आपको इसी प्रोफेशनल के बारे मे बताने वाला हूँ कि Film Critic Kaise Bane? इसलिए इस पोस्ट को ध्यान से पढिए।

Film Critic क्या होता है और इसका क्या काम होता है?

फ़िल्म क्रिटिक एक प्रोफेशनल होता है जो फ़िल्म देखने के बाद दर्शकों को अपने Critical Review देता है। अपने रिव्यू के आधार पर वो दर्शकों को बताता है कि फ़िल्म कैसी है? दर्शक किसी फ़िल्म को देखें या न देखें, बहुत हद तक इसके रिव्यू पर निर्भर करता है। आजकल की फिल्में क्रिटिक के रिव्यू और स्टार रेटिंग के आधार पर पॉपुलर या फ्लॉप हो जाती है।

एक Film Critic का काम पूरी फ़िल्म का पोस्ट्मॉर्टेम करने जैसा है। वो dialogue delivery से लेकर, मूवी की कहानी, पात्रों का चयन, उनकी वेशभूषा, एक सीन की दूसरे सीन से connectivity, मूवी निर्देशन, cinematography, पात्रों की बॉडी लैंग्वेज, पात्रों का मेकअप, गीत और संगीत, मूवी के लिए जगहों के चयन आदि के बारे में बहुत गहनता से विश्लेषण करता है। इन सभी को देखने के बाद ही वो अपने रिव्यू देता है।

चूंकि फ़िल्म बनाने मे बहुत सारी कमियाँ रह जाती है जो आम लोगों कि नजर मे नहीं आती। पर एक film critic ही ऐसा है जिसका काम ही मूवी मे कमियाँ या अच्छाई निकालना है। यही कारण है कि फ़िल्म रिलीज होने के बाद सिनेमा प्रेमियों को Critic’s Review का बेसबरी से इंतजार रहता है।

Film Critic Kaise Bane ?

वैसे तो फ़िल्म क्रिटिक बनने के लिए विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है। पर यदि आप 12 वीं के बाद फ़िल्मों से संबंधित डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर लेते हैं तो एक अच्छे फ़िल्म क्रिटिक बन सकते है। इंडिया में फिल्म क्रिटिक बनने के लिए अभी कोई कोर्स उपलब्ध नहीं हैं, पर आप चाहें तो अन्य फ़िल्म क्रिटिक्स की तरह इससे मिलते जुलते क्षेत्र में डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। मास कम्यूनिकेशन या जर्नलिज़म में स्नातक की डिग्री लेकर भी आप अपनी स्किल्स को इम्प्रूव कर सकते हैं।

उपरोक्त कोर्स कर लेने के बाद आप एक स्वतंत्र फ़िल्म क्रिटिक बन सकते हैं या किसी मीडिया एजेंसी के साथ जुड़कर अपने काम को जारी रख सकते हैं।

फ़िल्म क्रिटिक के अंदर क्या स्किल्स होनी चाहिए | Skills Required for Film Critic

फ़िल्मों को देखना और उनका विश्लेषण करके दर्शकों को अपने निष्पक्ष कमेन्ट देना अच्छी स्किल्स पर ही निर्भर करता है। इसमें महारत हासिल करने के लिए आपके अंदर ये गुण कूट कूट कर भरे होने चाहिए।

  1. Complete Knowledge of Films: एक फ़िल्म क्रिटिक को फ़िल्मों एवं इसके सभी पहलुओं पर गहरी समझ होनी चाहिए।
  2. Attend Film Festivals: हमारे देश में कई प्रकार के Film Festivals आयोजित किये जाते हैं। आपको इन आयोजनों मे शिरकत करनी चाहिए।
  3. High Reporting Skills: फ़िल्मों को देखकर आपके मन में जो विचार आते हैं, आपके अंदर उन्हे एक्स्प्रेस करने की कला आनी चाहिए। मान लीजिए आपको कोई मूवी पसंद आई है तो ‘अच्छी मूवी है’ कह देना ही काफी नहीं है। आपको बताना पड़ेगा कि यह मूवी रहस्य और रोमांच से भरपूर है या फिर इसी तरह कुछ और। अभी आप समझ ही गए होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।
  4. High Reasoning Skills: जब आप मूवीज को रिव्यू कर रहे होते हैं तब आपको अपनी तार्किक क्षमता का इस्तेमाल करना आना चाहिए। मतलब डायरेक्टर ने जो मूवी बनाई है, वो पठकथा के अनुसार सही जा रही है, या यूँ ही दिशाहीन हो गई है। पात्रों को जो रोल दिए गए है, क्या उन रोल को कोई और अच्छे से निभा सकता था आदि प्रश्न आपके मन में जरूर आने चाहिए।
  5. Unbiased approach: सभी की अपनी अपनी पसंद होती है। कोई एक्शन मूवीज देखना चाहता है तो कोई हॉरर। किसी को रोमांटिक मूवीज पसंद हैं तो किसी को ड्रामा। आपका झुकाव भी किसी न किसी तरफ तो जरूर होगा, मगर इन सबको इग्नोर करके आपको हर प्रकार की मूवीज को बिना किसी भी तरफ का पक्ष लिए निष्पक्ष रूप से अपने रिव्यू देना आना चाहिए। आपका रिव्यू पूरी तरह से unbiased होना चाहिए।
  6. High analytical power: एक अच्छे फ़िल्म क्रिटिक को समाज मे हो रही घटनाओं का और उस आधार पर बनी फ़िल्मों की तत्कालीन समीक्षा करनी आनी चाहिए। उन मूवीज को डायरेक्टर ने कैसे निर्देशित किया है उस पर आपकी टिप्पणी जरूर आनी चाहिए।
  7. Keen Observer: फिल्में तो सभी देखते हैं मगर एक क्रिटिक होने के नाते आप फ़िल्मों में वो सब जरूर देखें जो आम लोग नहीं देख पाते। इसके लिए आपको अपना ध्यान केंद्रित करके अच्छा observer होना बहुत जरूरी है। अगर आप कोई scene ya dialogue delivery मिस कर देते हैं तो समझिए आपने रिव्यू करने का दायरा ही कम कर लिया।

Film Critic Job Opportunities

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Image by Gerd Altmann from Pixabay

इस क्षेत्र मे करिअर बनाने की भरपूर संभावनाएं हैं। जिस तरह से हर सप्ताह दर्जन भर से ज्यादा मूवीज रिलीज होती है, वैसे ही आपके काम करने के अवसर भी बढ़ रहे हैं। अभी केवल सिनेमा ही नहीं, टी वी सीरीअल, टी वी सीरीज़, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग मीडिया पर भी अनेकों मूवी रिलीज होती रहती हैं। आप कहीं पर भी, किसी भी प्लेटफॉर्म पर Critic’s Review दे सकते हैं।

इंडिया के टॉप 10 मोस्ट फेमस फ़िल्म क्रिटिक्स

दोस्तों, जब आप इस क्षेत्र मे करिअर बनाने की सोच रहे हैं तो आपके मन मे ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि Who are the most famous Indian Film Critics? आपकी इसी जिज्ञासा को दूर करने के लिए मैं इंडिया के 10 मोस्ट फेमस फ़िल्म क्रिटिक्स की लिस्ट शेयर कर रहा हूँ। आप इनके बारे में और अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो मुझे जरूर बताए।

  1. अनुपमा चोपड़ा: ये एक ऑथर, जर्नलिस्ट और मुम्बई फ़िल्म फेस्टिवल की डायरेक्टर हैं।
  2. तरण आदर्श: फ़िल्म क्रिटिक के साथ ये एक ट्रैड ऐनलिस्ट हैं।
  3. राजीव मसंद: ये पूर्व मे CNN-IBN न्यूज चैनल में काम कर चुके हैं और बॉलीवुड तथा कुछ हॉलिवुड फिल्मों में क्रिटिक का काम करते हैं।
  4. कोमल नहटा: ये एक बॉलीवुड ट्रैड ऐनलिस्ट हैं।
  5. बिकास मिश्रा: ये इंडियन स्क्रीनराइटर और फ़िल्म डायरेक्टर हैं।
  6. डेरेक बोस: ये जाने माने ऑथर और जर्नलिस्ट हैं जिन्होंने पूर्व में इंडियन एक्स्प्रेस और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया मे काम किया है।
  7. मयंक शेखर: ये एक ऑथर, फ़िल्म जर्नलिस्ट और हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक हैं।
  8. रंजन भारद्वाज: ये एक ऑथर और The Hindu newspaper के उप संपादक हैं।
  9. खालिद मोहम्मद: ये पूर्व जर्नलिस्ट और फिल्मफेयर मैगजीन के एडिटर इन चीफ हैं।
  10. ओमर कुरेशी: ये ज़ूम टी वी चैनल मे एडिटर इन चीफ हैं।

Film Critic Salary

करिअर के शुरुआती दौर मे आपको मूवी रिव्यू करने के लिए प्रति माह 25 हजार रुपये से 30 हजार रुपये तक की सैलरी मिल जाएगी। अनुभव होने के बाद, और आपकी लोकप्रियता के आधार पर तो आपको मुंह मांगी सैलरी मिलेगी। इस क्षेत्र मे पहले से काम कर रहे बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जिनकी मासिक सैलरी 1 लाख से 1.5 लाख रुपये है। अब आप सोच सकते हैं कि फिल्मों के रिव्यू करने के लिए आप कितना कमाना चाहते हैं।

निष्कर्ष | Conclusion

दोस्तों, आपके देखा कि वर्तमान समय में एक Film Critic का क्या रोल है? लोग सिनेमा देखने इसीलिए जाते हैं ताकि उनका मनोरंजन हो सके और वो कुछ नया देख सकें। अगर फ़िल्म खराब निकली तो इससे लोगों का पैसा और समय दोनों खराब हो जाते हैं। ऐसे समय में फ़िल्म क्रिटिक का रोल बहुत मत्वपूर्ण हो जाता है। अब तो लोग सिनेमा देखने तभी जाते हैं, जब उन्होंने इसका रिव्यू देख लिया हो।

आप कभी गौर करें कि आम जनता भी रिव्यू देती है, मगर उनके रिव्यू मे और एक professional Film Critic के रिव्यू मे जमीन आसमान का अंतर होता है। आपको ये बात तो माननी पड़ेगी कि जिस किसी भी फ़िल्म को फ़िल्म क्रिटिक ने अच्छा बोल दिया या अच्छी रेटिंग दे दी वो मूवी अच्छी नहीं, बहुत अच्छी होती है। आप चाहें तो आजमा कर देख लें।

दोस्तों, मुझे आशा है कि आपको ये पोस्ट पसंद आया होगा और आप जान गए होंगे कि Film Critic kya hota hai और Professional Film Critic Kaise Bane? इस क्षेत्र मे करिअर बनाने के लिए कोर्स करना बाध्य नहीं है, अगर आप सिनेमा प्रेमी हैं और इस पोस्ट मे Skills required for a film critic के बारे मे जान लिया है तो आप इस प्रोफेशन में अपना करिअर बना सकते हैं।

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